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मायावती का कांग्रेस-सपा पर हमला
मायावती का कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला, महिला आरक्षण और पिछड़ों के अधिकारों को लेकर उठाए गंभीर सवाल
17 Apr 2026, 10:27 AM Uttar Pradesh - Lucknow
Reporter : Mahesh Sharma
Lucknow

महिला आरक्षण पर कांग्रेस की नीयत पर सवाल

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख Mayawati ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक सत्ता में रहते हुए भी महिलाओं को उनका हक देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। मायावती ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नारा बनकर रह गया है, जबकि इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब कांग्रेस को अवसर मिला, तब उसने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया और अब चुनावी समय में इसे फिर से उठाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह जनता को भ्रमित करने की रणनीति है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को लेकर ठोस नीति और ईमानदार प्रयास की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि केवल वादों से बदलाव नहीं आता। मायावती ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिलाओं के अधिकारों की पक्षधर रही है और उन्होंने अपने शासनकाल में कई कदम उठाए थे, जिनसे महिलाओं को लाभ मिला।


सपा पर भी साधा निशाना, पिछड़ों की अनदेखी

मायावती ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि Samajwadi Party जब भी सत्ता में आती है, तब पिछड़े वर्गों के हितों को नजरअंदाज कर देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सिर्फ चुनावी समय में पिछड़ों की बात करती है, लेकिन सरकार बनने के बाद उनके अधिकारों को भुला देती है। मायावती के अनुसार, पिछड़ा वर्ग आज भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है, जिसका जिम्मेदार सपा और कांग्रेस दोनों हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन पार्टियों ने पिछड़ों के नाम पर सिर्फ राजनीति की है, लेकिन उनके विकास के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई। मायावती ने यह दावा किया कि उनकी पार्टी ने हमेशा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर काम किया है और हर वर्ग को बराबरी का अधिकार देने की कोशिश की है। उन्होंने सपा की नीतियों को अवसरवादी बताते हुए कहा कि जनता को अब इनकी सच्चाई समझ आ चुकी है।


संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ का आरोप

मायावती ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि संविधान ने इन वर्गों को जो अधिकार दिए हैं, उन्हें पूरी तरह लागू करने में कांग्रेस विफल रही है। मायावती ने यह भी कहा कि कई बार ऐसे फैसले लिए गए, जिनसे इन वर्गों के अधिकार कमजोर हुए। उनके अनुसार, यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने यह भी कहा कि इन वर्गों को हमेशा राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया, लेकिन उनके वास्तविक सशक्तिकरण के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया। मायावती ने संविधान की भावना को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि जब तक सभी वर्गों को समान अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक सामाजिक न्याय संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी संविधान के सिद्धांतों पर चलती है और हमेशा कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी।


चुनावी राजनीति में मुद्दों के इस्तेमाल पर सवाल

मायावती ने कहा कि महिला आरक्षण और पिछड़ों के अधिकार जैसे गंभीर मुद्दों को सिर्फ चुनावी राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा दोनों ही इन मुद्दों को चुनाव के समय उठाती हैं और बाद में इन्हें भूल जाती हैं। उनके अनुसार, यह जनता के साथ धोखा है और इससे लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि अगर इन पार्टियों की नीयत साफ होती, तो अब तक इन मुद्दों पर ठोस परिणाम दिखते। मायावती ने यह भी कहा कि जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह ऐसे वादों में नहीं आने वाली। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे गंभीर मुद्दों को सिर्फ वोट बैंक के नजरिए से न देखें, बल्कि उनके समाधान के लिए ईमानदारी से काम करें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा मुद्दों की राजनीति करती है और जनता के हित को प्राथमिकता देती है।


दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज को दी सलाह

मायावती ने एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि इन वर्गों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। उनके अनुसार, कई राजनीतिक दल इन वर्गों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखते हैं और चुनाव के बाद उन्हें भूल जाते हैं। मायावती ने कहा कि इन समुदायों को अपनी ताकत पहचाननी होगी और ऐसे नेताओं को चुनना होगा, जो वास्तव में उनके हित में काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक एकता और जागरूकता ही इन वर्गों को मजबूत बना सकती है। मायावती ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाएं और उन्हें सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि जब तक ये वर्ग एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनके अधिकारों की रक्षा करना मुश्किल होगा।


आने वाले चुनावों से पहले सियासी हलचल तेज

मायावती के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। Bahujan Samaj Party की रणनीति को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में वह इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण और पिछड़ों के अधिकार जैसे मुद्दे चुनावी बहस का केंद्र बन सकते हैं। मायावती के बयान से यह साफ है कि वह कांग्रेस और सपा दोनों को सीधी चुनौती दे रही हैं। इससे राज्य में राजनीतिक मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। वहीं, अन्य दल भी इन मुद्दों पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन बयानों को किस तरह से लेती है और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है और सभी दल अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गए हैं।


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