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एआई बदलाव लाएगा रोजगार में
एआई से कुछ नौकरियां जाएंगी, नई भी बनेंगी आगे
एआई से रोजगार खत्म नहीं होंगे, बदलाव के साथ नए अवसर बढ़ेंगे: रघुराम राजन
27 Feb 2026, 05:53 PM
Maharashtra
-
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
Mumbai
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर दुनिया भर में नौकरियों पर पड़ने वाले असर की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर Raghuram Rajan ने एआई के कारण भारत में बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म होने की आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया है। उनका कहना है कि एआई से काम करने के तरीके बदलेंगे, लेकिन इसे केवल नौकरी छिनने के खतरे के रूप में देखना सही नहीं होगा।
हाल के कार्यक्रमों और बातचीत के दौरान राजन ने कहा कि एआई तकनीक कई नियमित और दोहराए जाने वाले कार्यों को स्वचालित जरूर बनाएगी। खास तौर पर कोडिंग, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बैक-ऑफिस प्रक्रियाएं और ग्राहक सहायता जैसे क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में कुछ पारंपरिक नौकरियों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी बदलाव के साथ नए प्रकार के रोजगार भी पैदा होंगे। एआई के बढ़ते उपयोग से उच्च कौशल वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी और नए क्षेत्रों में अवसर सामने आएंगे। उनका मानना है कि एआई को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखने की जरूरत है।
राजन ने कहा कि भारत का आईटी और सेवा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों लोगों को रोजगार देता है। ऐसे में एआई का प्रभाव इस क्षेत्र पर जरूर पड़ेगा, लेकिन यह पूरी तरह नकारात्मक नहीं होगा। सही नीतियों और कौशल विकास के माध्यम से भारत इस बदलाव का लाभ उठा सकता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा, जिससे कंपनियां अधिक कुशलता से काम कर सकेंगी। इससे उत्पादकता में वृद्धि होगी और नई सेवाओं की मांग पैदा होगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा।
राजन के अनुसार आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती लोगों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना होगी। अगर कौशल विकास पर ध्यान दिया गया तो भारत एआई क्रांति का बड़ा लाभ उठा सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई को लेकर डर फैलाने के बजाय इसके व्यावहारिक प्रभाव को समझना जरूरी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि भारत इस तकनीकी बदलाव को अवसर में बदल पाता है या नहीं। फिलहाल एआई को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई जा रही है।
हाल के कार्यक्रमों और बातचीत के दौरान राजन ने कहा कि एआई तकनीक कई नियमित और दोहराए जाने वाले कार्यों को स्वचालित जरूर बनाएगी। खास तौर पर कोडिंग, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बैक-ऑफिस प्रक्रियाएं और ग्राहक सहायता जैसे क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में कुछ पारंपरिक नौकरियों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी बदलाव के साथ नए प्रकार के रोजगार भी पैदा होंगे। एआई के बढ़ते उपयोग से उच्च कौशल वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी और नए क्षेत्रों में अवसर सामने आएंगे। उनका मानना है कि एआई को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखने की जरूरत है।
राजन ने कहा कि भारत का आईटी और सेवा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों लोगों को रोजगार देता है। ऐसे में एआई का प्रभाव इस क्षेत्र पर जरूर पड़ेगा, लेकिन यह पूरी तरह नकारात्मक नहीं होगा। सही नीतियों और कौशल विकास के माध्यम से भारत इस बदलाव का लाभ उठा सकता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा, जिससे कंपनियां अधिक कुशलता से काम कर सकेंगी। इससे उत्पादकता में वृद्धि होगी और नई सेवाओं की मांग पैदा होगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा।
राजन के अनुसार आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती लोगों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना होगी। अगर कौशल विकास पर ध्यान दिया गया तो भारत एआई क्रांति का बड़ा लाभ उठा सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई को लेकर डर फैलाने के बजाय इसके व्यावहारिक प्रभाव को समझना जरूरी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि भारत इस तकनीकी बदलाव को अवसर में बदल पाता है या नहीं। फिलहाल एआई को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई जा रही है।
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